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ज़ीरो- प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर आपातानी जनजाति समुदाय का घर

अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में ‘जीरो’ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक छोटी सी घाटी है जिसे आपातानी जनजाति समुदाय का घर कहा जाता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए इस छोटी सी घाटी में देखने लायक काफी कुछ है और यहाँ की संस्कृति से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। समुद्र की सतह से 5745 मीटर ऊपर अरुणाचल प्रदेश में बसा ‘जीरो’ दुनिया के बेहतरीन स्थानों में से एक है। जीरो यहाँ के देवदारु से घिरे पहाड़ों, यहाँ के घने जंगलों, धान की खेती तथा मछली पालन के लिए मशहूर है।

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जीरो अरुणाचल प्रदेश के आपातानी जनजाति समुदाय का घर है। यह समुदाय दुनिया के उन समुदायों में से एक है जो प्रकृति (सूर्य, चंद्र) की पूजा करता है। यह समुदाय सतत कृषि (sustained farming) और सामाजिक वानिनी (social forestry) के लिए प्रसिद्ध है। अप्रैल 2014 में आपातानी को जीरो के यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में उच्च उत्पादन और प्रकृति संरक्षण की अद्वितीय प्रणाली के लिए शामिल किया गया।

Ziro-2आपातानी समुदाय कृषि जीवी है। यह लोग धान की खेती में सतत और प्रभावशाली प्रणाली अपनाए जाने के लिए प्रसिद्ध है। यहां के खेत स्पाट जमीन पर बने है इसलिए मछली पालन के साथ ही यहाँ गीली धान की खेती की जाती है। यहाँ के खेतों में सिंचाई प्रभावशाली चैनलों और नहरों से की जाती है। खेतों में पशुओँ या मशीनों का इस्तेमाल नहीं होता बल्कि प्राकृतिक और सतत प्रणाली (sustained methods) के उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जाता है। घाटी में चारों तरफ वनों का संरक्षण भी बेहतरीन ढंग से किया गया है जो खेतों तक पहुँचने वाले जल प्रपातों के लिए वाटर शेड का काम करते है और इस प्रकार सिंचाई व्यवस्था में मदद करते है। यहाँ के लोग ऐसी पारंपरिक पद्धति का प्रयोग करते है जो आधुनिक मशीनों और प्रणालियों को भी पीछे छोड़ देते है।

paddy field यहाँ के लोग बांस से बने घरों में रहते है जिन्हें बस्ती कहा जाता है। यहाँ के सभी घर पारंपरिक ढंग से निर्मित है। घर के बीच में बना किचन न केवल खाना पकाने की जगह है बल्कि यहाँ लोग इकट्ठा होकर और बीच में अलाव जलाकर एक दूसरे के साथ गपशप करते है, टीवी देखते है और तरह-तरह के मनोरंजन करते हैं।

आपातानी समुदाय की एक अनोखी विशेषता यहाँ की महिलाओं से जुड़ी है। परंपरा से चली आ रही है कि यहाँ की  महिलाएं अपने चेहरे पर टैटू गुद्वाती है और नाक छिदवाकर उसमें नथनी पहनती है। अकसर पर्यटक इन महिलाओं की तस्वीरें खींचते है और अपने साथ ले जाते है। इस तरह की परंपरा क्यों शुरू हुई उसकी कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन युवा पीढ़ी अब इस परंपरा से दूरी बनाने लगी है। यहाँ तक की पुरानी पीढ़ी की महिलाएं भी अब इस परंपरा को छोड़ रही है।

कैसे पहुचें, और कहाँ ठहरें-

Ziro-3जीरो पहुँचने के लिए बहुत तकलीफ नहीं उठाना पडेगा. जीरो तक रेल लाइन नहीं हैं. जीरो सड़क मार्ग से ही देश के दुसरे भाग से जुड़ा हुआ है. नज़दीकी रेलवे स्टेशन असम का लखीमपुर है. लखीमपुर के लिए बोंगाईगाँव से ट्रेन चलती है। निजी और अरुणाचल सरकार की बसें भी चलती हैं. आप गुवाहाटी, लखीमपुर, और तेज़पूर से बस में भी सफ़र कर के जीरो पहुँच सकते हैं।

नजदीकी हवाई अड्डा, तेजपुर, लखीमपुर और गुवाहाटी है. आप जहाज़ से यहाँ आ सकते हैं, और यहाँ से सड़क मार्ग से जीरो जा सकते हैं।

जीरो में ठहरने के लिए टूरिस्टलॉज और सर्किट हाउस के अलावा कई होटल भी हैं।

अरुणाचल में प्रवेश करने से पहले ILP यानी इनर लैंड परमिट लेना ज़रूरी है। आप गुवाहाटी, कोल्कता, दिल्ली, मुंबई, लखीमपुर, तेजपुर जहां भी अरुणाचल प्रदेश सरकार का दफ्तर है वहां से ILP निकाल सकते हैं। यह कुछ मिनटों में ही मिल जाता है।

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