राष्ट्रीय रेलवे मानचित्र से जुड़ी पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियां

कोहिमा

पूर्वोत्तर राज्यों की सात राजधानियां राष्ट्रीय रेलवे मानचित्र से जुड़ गई है| अब सन 2020 तक हार्नबिल फेस्टिवल देखने के लिए कोहिमा जाने वालों को डिमापुर में ही ट्रेन से नहीं उतरना पड़ेगा| मौजूदा कोहिमा जाने वाले यात्रियों को डिमापुर में ही ट्रेन से उतरकर नगालैंड की राजधानी तक टैक्सी लेनी पड़ती है|

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सन 2007 में ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित की गई 2,315 करोड़ की 88 किलोमीटर लंबी धनसिरी-कोहिमा रेलवे ट्रैक परियोजना की हाल ही में नींव रखी है जिससे इसके साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों की सात राजधानियां राष्ट्रीय रेलवे मानचित्र से जुड़ गई है| इनमें सबसे आखिर में कोहिमा है| इंफाल, आईजल और शिलांग, इन तीन राजधानियों को जोड़ने का काम तेज गति से चल रहा है और अगले तीन साल में यह काम पूरा होने की उम्मीद है|

रेलवे संप्रसारण के क्षेत्र में पूर्वोत्तर क्षेत्र सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है| एक बार इन परियोजनाओं के पूरा होते ही ना केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन होगा बल्कि क्षेत्र की आर्थिक दशा में भी सुधार होगा|

अगरतला को ना केवल नई दिल्ली तक सीधे रेलवे सेवा से जोड़ा गया है बल्कि रेल मंत्री ने 15 किलोमीटर रेलवे लाइन की नींव भी रखी है जो अगरतला को बांग्लादेश के अखौरा से जोड़ेगा|

इन परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है 111 किलोमीटर लंबी जिरिबाम तुपुल-इंफाल रेलवे लाइन जो मणिपुर की राजधानी इंफाल को कुछ ही सालों में रेलवे मानचित्र से जोड़ देगा| हालांकि इस परियोजना का काम कुछ प्रतिशत पूरा हो चुका है|


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