ज़रूर पढ़िए: कितने गंदे होते हैं ट्रेन में दिए जाने वाले कंबल

नई दिल्ली                                 

किया आप जानते हैं कि कितने गंदे होते हैं ट्रेन में यात्रियों को दी जाने वाले कबल, शायद नहीं। ट्रेनों में रेल यात्रियों को मिलने वाले चादरों, तकियों और कंबलों से बदबू आने की शिकायतों को ले कर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि उन कंबलों की धुलाई दो महीने में एक बार की जाती है। मनोज सिन्हा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न सदस्यों के सवालों के जवाब में कहा कि चादरों, तकियों के खोलों को हर दिन साफ किया जाता है जबकि कंबलों को दो महीनों में धोया जाता है। कुछ सदस्यों ने ट्रेनों में रेलवे द्वारा दिए जाने वाले चादरों, कंबलों आदि की सफाई को लेकर शिकायतें की थीं।

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सभापति हामिद अंसारी ने कहा कि अपना बिस्तरबंद ले जाने का पुराना चलन ही अच्छा था। सिन्हा ने कहा कि यह अच्छी सलाह है और रेलवे को कोई समस्या नहीं होगी अगर यात्री उस चलन को स्वीकार करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यात्रियों से बेडरॉल की गुणवत्ता के संबंध में समय-समय पर पत्र प्राप्त होते रहते हैं। उन उचित कार्रवाई की जाती है। सिन्हा ने कहा कि इससे पहले आउटसोर्स की गई लांड्री सेवाओं के बारे में घटिया धुलाई को लेकर नियमित शिकायतें मिलती रहती थीं। इसलिए रेल ने अपने नियंत्रण में मशीनीकृत लांड्रियां स्थापित करने का निश्चिय किया।

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कांग्रेस के विजय दर्दा ने जानना चाहा कि क्या कोई व्यक्ति अपना बिस्तरबंद रेल सफर के दौरान ले जा सकता है। इस पर सिन्हा का कहना था कि यह अच्छा सुझाव है और इसमें रेलवे को कोई आपत्ति नहीं है।

अब तक 41 ऐसी लांड्रियां स्थापित कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि अगले दो साल में 25 और ऐसी लांड्रियां चालू करने की योजना है। इसके बाद करीब 85 फीसद यात्रियों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा

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