हिंदी भाषी नहीं, खुद की पहचान असमिया के रूप में दे – राज्यपाल

गुवाहाटी

राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने राज्य में पले-बढ़े तथा वर्षों से बसे हिंदी भाषियों को खुद की पहचान असमिया के रूप में देने की नसीहत दी है| सोमवार को खानापाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल पुरोहित ने एक मजेदार किस्सा सुनाया|

उन्होंने बताया कि उनसे मिलने तमाम लोग आते है| उनमें से कुछ हिंदी पट्टी से ताल्लुक रखने वाले भी शामिल है| भेंट के दौरान खुद को हिंदी पट्टी का बताकर कुछ लोग हिंदी में ही बातें करने लग जाते है| उन्होंने कहा, “चूँकि मैं भी हिंदी पट्टी से हूँ तो उन लोगों से हिंदी में ही बातें करता हूँ| जब उनसे पूछता हूँ तो वे बताते है कि उनके दादा-परदादा लंबे अरसे से असम में ही रहे और यहीं अंतिम साँस ली| वे खुद भी यहीं पैदा हुए और पढ़े-लिखे भी|”

इतना सुनने के बाद मैंने हिंदी पट्टी के उन लोगों से पूछा – आप लोग यहीं पले-बढ़े तो खुद को क्यों हिंदी पट्टी के रूप में परिचय दे रहे है? मैं भी तो हिंदी पट्टी का ही हूँ| मैं राजस्थान से हूँ पर नागपुर (महाराष्ट्र) से विधायक बना था| मैं वहां जब था तो खुद को महाराष्ट्रीयन के रूप में परिचय देता था| इसलिए अगर आप लोग भी यहीं पले-बढ़े है, आपके दादा-परदादा सालों से यहीं रहे और गुजर भी गए, तो आप खुद को असमिया के रूप में परिचय क्यों नहीं देते| राज्यपाल ने कहा – मैं अभी यहाँ हूँ तो असमिया ही हूँ|


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