नोटबंदी- नार्थईस्ट में आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है, एक्सपर्ट

MANZAR ALAM- TAWANG

गुवाहाटी 

By Manzar Alam, Founder Editor

नोट बंदी के 20 दिन गुज़र चुके हैं. 20 दिनों के बाद नोट बंदी को ले कर एटीएम और बैंकों में भीड़ ज़रूर कम हुई है लेकिन आम लोगों की परेशानियां ख़त्म हो गई हैं यह कहना ग़लत होगा. नोट बंदी को ले कर अच्छे और खराब दोनों ही नतीजे अब धीरी धीरे सामने आएँगे. आने वाले दिनों में नार्थईस्ट में नोट बंदी का किया और कैसा असर देखने को मिलेगा और इस से निपटने के लिए सरकार को कैसे क़दम उठाने की ज़रुरत है यह जान्ने के लिए हम ने गुवाहाटी के जाने माने उद्योगपतियों से बात की और उन की राय जाना. जो सब ने कहा वह यही है कि

  • आने वाले दिनों में देश भर में ख़ास कर नार्थईस्ट में भारी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है.
  • दूसरा यह कि नोट बंदी का फैसला एक अच्छा क़दम था लेकिन इस लागू करने से पहले और कई पहलुओं पर यदी गौर कर लिया जाता तो आम जनता को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती.
  • दूर दराज़ इलाकों और छोटे छोटे गाँव में हालात दयनीय हैं. ख़ास कर चाय बगानों में हालात खराब हो रहे हैं. और समय रहते कोइ समधान नहीं निकाला गया तो स्थिति बिगड़ सकती है.

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Ashok Dhanuka –  Businessman

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का 500 और 1000 के नोट बंदी का फैसला बिलकुल सही था लेकिन इसे लागू करने में कुछ कमियाँ रह गई. जैसे अभी तक गुवाहाटी में 500 के नए नोट नहीं आये हैं. जब की दिल्ली, मुंबई और दुसरे बड़े शहरों में आ गए हैं. सरकार डेबिट कार्ड से खरीदारी करने पर अधिक जोर दे रही है. यह एक अच्छा सुझाव है लेकिन इस से महंगाई बढ़ेगी. वह इस तरह कि अगर कोई व्यपारी कोई भी सामान 40 रूपए किलो खरीदता है तो उसे 4% टैक्स चुकाना पड़ता है जिस से खरीदे गए सामाग्री की कीमत सीधे सीधे 4 रूपए प्रति किलोग्राम बढ़ जाता है. इस लिए मेरा सुझाव है कि डेबिटकार्ड से खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए इस पर लिए जाने वाले सर्विस और अन्य टैक्स को हटाने के बारे में सरकार को विचार करना चाहिए. दूसरी बात यह है कि नॉर्थईस्ट में व्यपारियों का अधिकतर लेन देन कैश में होता है. छोटे छोटे व्यपारीयों का तो बैंक खता ही नहीं है. वोह बेचारा रोज़ माल खरीदता है और रोज़ बेचता है. इन्टरनेट सेवा भी यहाँ बड़े शहरों के मुकाबले अच्छी नहीं है. ऐसे में नार्थईस्ट में डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में व्यपारियों को परेशानी हो सकती है, लेकिन फिर भी यह एक अच्छा सुझाव है.  जहां तक काले धन का सवाल है. उस में सरकार को सफलता ज़रूर मिली है लेकिन जनता को यह कुछ समय के बाद ही समझ में आएगा.

sk-jainS K Jain- CMD, SM Group

नोट बंदी का फैसला सही है, अभी नहीं लेकिन लंबे समय के बाद इस का अच्छा असर देखने को मिलेगा. हाँ यह ज़रूर है की नोट बंदी स्कीम को लागू करने में कुछ कमियाँ रह गईं, जिस से एक आम आदमी को अभी तक परेशानी उठानी  पड़ रही है. दूर दराज़ के छोटे छोटे गाँव में आज भी लोगों के पास बैंक खाता नहीं है. लोग अभी भी नगदी  लेन देन में विशवास रखते हैं. नोट बंदी के कारण खुदरा बाज़ार के लेन देन में 50 से 60 प्रतिशत की गिरावट आयी है. लोगों के पास खरीदारी के लिए पैसे ही नहीं है. जो पुराने नोट थे वह बैंक में जमा कर दिए और अब बैंक से ज़रुरत के अनुसार निकाल नहीं पा रहे हैं. अगर हम यह कहें की नोट बंदी का असर आज के दिनों में आर्थिक व्यवस्था पर पड़ रहा है तो गलत नहीं होगा. और ऐसा लगता है कि अगले दो तीन महीनो तक यह गिरावट जारी रहेगी.

hs-kumbhatH S Kumbhat,  Tea Planter

नोट बंदी के बाद चाय बगानों की स्थिती बहुत खराब हो गयी है. असम के कुछ चाय बगानों में तो जिला प्रशासन के की मदद से एक दो सप्ताह की मजदूरी तो मजदूरों को दी जा सकी  है लेकिन बंगाल के चाय बगानों की स्थिति दयनीय है. वहां के चाय बगान में मजदूरों को मजदूरी नहीं दे पा रहे हैं. जिला प्रशासन या बैंक की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. बगान मालिक बैंक और जिला प्रशासन के कार्यालों का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोइ व्यवस्था नहीं हो पा रही  है. मजदूर इस बात को समझ रहे हैं लेकिन उन के अन्दर रोष दिखने लगा है और किस समय यह भड़क उठेंगे कहा नहीं जा सकता. उन के घरों में अनाज ख़त्म हो रहे हैं. मजदूरी देने और अनाज खरीदने के लिए बगान मालिकों के पास पैसे तो हैं लेकिन बैंक से निकाल नहीं सकते. अगर समय रहते इस का कोइ समधान नहीं ढूंडा गया तो स्थिति भयानक रूप ले सकती है.

manoj-sethiaManoj Sethia, Director, Hotel Rajmahal,

सरकार की नियत तो ठीक है लेकिन इसे लागू करने से पहले सभी पहलुओं पर सही तरीके से गौर किया जाता तो शायद और अच्छा होता. खुदरे बाज़ार में और एक आम आदमी पर नोट बंदी का असर बहुत खराब पड़ा है. बाज़ार ठप हो गया है जिस से रोजाना होने वाली आमदनी बंद हो गई है. जब आमदनी ही नहीं होगी तो लोग खाएंगे कहाँ से. रोजाना कमाने और खाने वाले लोग जो पैसे बचा कर रखे थे वह बैंक में जमा तो करा दिए,  लेकिन बैंक से निकालाना उन के लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है. काले धन के नाम पर एक आम आदमी परेशान हो रहा है जिस की महनत और पसीने की कमाई है, जो की नहीं होना चाहिए था. या यूं कह लें की गेहूं के साथ जौ भी पिस रहा है तो गलत नहीं होगा. इस नोट बंदी से फिलहाल उनलोगों पर तो कोइ असर नहीं होगा जो अचल संपत्ती या गोल्ड के रूप में धन जमा कर रखे हैं. अब सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ किया कारवाई करती है या किया क़दम उठाती यह भी  देखने योग्य होगा.

rs-joshiR S Joshi , Former Chairman, FINER

नार्थईस्ट की आर्थिक व्यवस्था और कारोबार शतप्रतिशत नगदी पर आधारित है. ऐसे में नोट बंदी के कारण नगदी कारोबार में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आई है. नोट बंदी एक अच्छा क़दम है लेकिन इस का असर शायद एक लंबे समय के बाद देखने को मिलेगा. इस बीच जो आज ट्रांजीशन पीरियड है उसे जल्द से जल्द स्मूथ करने की ज़रुरत है. और इस के लिए सरकार को वारफुटिंग स्तर पर काम करना होगा. करंसी की  व्यवस्था करवानी होगी. आज बैंकों और ऐटीएम में पैसे नहीं है. सरकार की नियत पर हमें रत्ती बराबर भी संदेह नहीं है लेकिन एक आम आदमी को खुद का पैसे बैंक से निकालने के लिए पूरा पूरा दिन लाइन में खड़ा रहना मैं समझता हूँ के सही नहीं है.शेयर बाज़ार में लगातार गिरावट देखा जा रहा है. अब जो इन्वेस्टर है वोह फ़ौरन नहीं लौटेगा इस लिए बाज़ार को भी संभालने में समय लगेगा. ओवर आल आर्थिक व्यवस्था में आने वाले कुछ महीनो तक तो गिरावट देखने को मिलेगी .

ramavtar-budakiaRamavtar Budakia, Businessman

सरकार द्वारा नोट बंदी को ले कर उठाया गया क़दम बिलकुल सही है. इस से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. जिस तरह शरीर में की बीमारी को दूर करने के लिए कडवी दवाई का घूँट भरना ज़रूरी हो जाता है उसी तरह भ्रष्टाचार से निपटने के लिए उठाया गया यह क़दम बिलकुल सही है और आम आदमी को थोड़ी  परेशानी झेलनी  पड़ रही  है. हाँ इतना ज़रूर है की कम से कम दो से तीन महीन तक व्यपार ठप रहेगा और बेरोजगारी बढ़ेगी लेकिन आने वाले दिनों में इस का अच्छा परिणाम भी सामने आएगा. बाज़ार में नगदी कारोबार की आदत अब कम करनी  होगी. कालाधन जमा करनेवालों पर तो अंकुश लगेगा.

anil-jainaAnil Jaina, Builder , Real State

क़दम अच्छा है लेकिन और सोच समझ कर उठाया जाता तो शायद अच्छा परिणाम मिलता और  आम जनता को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. आज सब से अधिक असुविधा एक आम नागरिक और व्यपारियों को हो रही है. आनेवाले दिनों में भारी मंदी का सामना करना पड़ सकता है. यह बड़ी अच्छी बात है कि  सरकार को जनता का पूरा पूरा सपोर्ट है. नोट बंदी का असर रियल स्टेट पर भी पड़ा है. इस से उबरने के लिए सरकार को प्रधान मंत्री आवास योजना में बदलाव लाना चाहिए. शहर में रहने वाले मिडिल किलास लोगों की ज़रुरत को नज़र में रखते हुए प्रधान मंत्री आवास योजना में बदलाव की सख्त ज़रुरत है. आज इन्वेस्टर नहीं है. अगर  इस योजना में कुछ बदलाव होता है तो रियल स्टेट को मदद मिलेगी.


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